कैमूर से रोहतास जिले की 5 किमी की दूरी हो जाएगी कम, दर्जनों गांवों के लोगों को आने जाने में समय की होगी बचत
ग्रामीणों में खुशी,कहा विधायक सांसद सिर्फ कई वर्षो से दुर्गावती नदी पर पुल बनाने का दे रहे है आश्वासन
रामपुर कैमूर। रामपुर प्रखंड के सबार गांव के दुर्गावती नदी पर के 2 जिलों को जोड़ने के लिए बीमा डालकर छलका का पुल बनाया जा रहा है। जिससे कैमूर जिले के रामपुर प्रखंड के सीमावर्ती दर्जनों गांवों के लोगों को आवागमन काफी सुगम हो जाएगा। यह छलका पुल का निर्माण सबार गांव के दुर्गावती नदी पर जिला परिषद मद से लगभग सात लाख रुपए की लागत से बनाया जा रहा है।
फिलहाल दुर्गावती नदी में ईंट के टुकड़े डालकर बड़े और छोटा बीमा डालकर छलका पुल निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है और बरसात से पूरा बनने की संभावना जताई जा रही है। छलका पुल निर्माण में कार्य रहे मिस्त्री सबार गांव के धनजी चौधरी ने बताया कि लगभग बीमा डाले जाने के बाद एक सप्ताह से काम लगा हुआ है। पूरे नदी में बड़ा और छोटा बीमा डाला जाएगा। बीमा के गैप को सीमेंट,गिट्टी,बालू के मिक्चर से बंद किया जा रहा है।
रोहतास जिले के चेनारी के सुशील कुमार, सबार गांव के ओमप्रकाश पासी ने बताया कि दुर्गावती नदी में जो जिला परिषद मद से छलका पुल बनाया जा रहा है। उससे लोगों को आने जाने में काफी अच्छा हो जायेगा। नदी पार नहीं करना पड़ेगा। छलका पुल से कैमूर से रोहतास के चेनारी एक से दो किमी की दूरी तय करने के बाद पहुंच जायेंगे।
साइकिल या बाइक से लोग चेनारी जाते है तो उन्हें भी नदी से होकर जाना पड़ता है। बाइक से जाने में पानी लोग गिर जाते है। छलका पुल बन जायेगा तो बाइक साइकिल या पैदल भी आसानी से रोहतास में जा सकते है। क्योंकि कैमूर से सीमावर्ती जिला रोहतास है और रोहतास के चेनारी में अच्छा बाजार है। जहां पर लोग बाजार करने या अन्य कामों से लोग आते जाते है।
छात्रों को पढ़ाई में दूरी होगी कम
छात्र छात्राओं ने बताया कि कैमूर के सीमावर्ती गांव सबार, पांडेयपुर, झाली, बहेरी, मझियाँव सहित अन्य गांवों के छात्र छात्राओ को रोहतास जिले के चेनारी में स्कूल,कॉलेज या कोचिंग के लिए प्रतिदिन पैदल या साइकिल से आना जाना पड़ता है। कई छात्र छात्राएं दुर्गावती नदी से होकर आते जाते है तो कई सड़क मार्ग से पांच से सात किमी की दूरी तय कर चेनारी आते जाते है। छलका पुल की खबर से हमललोगो में खुशी है। अब स्कूल,कॉलेज या कोचिंग आने जाने में परेशानी नहीं होगी। समय और दूरी की बचत हो जायेगी।
बड़ा पुल बनाने की है जरूरत
ग्रामीणों ने बताया कि अगर किसी को बस से सबार से चेनारी जाना होता है तो उसे सबार से अमाव दुर्गावती नदी पुल से होकर बस से चेनारी जाना पड़ता है। जिसकी दूरी लगभग 10 किमी दूरी हो जाती है। जिसके लिए लोगों को किराया भी ज्यादा देना पड़ता है। जबकि बाइक या ऑटो से चेनारी के लिए सिंचाई विभाग के नहर पथ होकर आने जाने में 5- 7 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है।
फिलहाल छलका पुल बन रहा है तो पैदल से बाइक वालों के लिए राहत हो जायेगा। लेकिन इस नदी पर बड़े वाहनों को आने जाने के लिए बड़े पुल बनाने की जरूरत है। अगर यहां इस नदी पर बड़ा पुल बन जायेगा तो बस या बड़े वाहनों को रोहतास के चेनारी या सासाराम तक भी जा सकते है। दूरी और समय की बचत होगी। लोगों को ज्यादा किराया भाड़ा नहीं देना पड़ेगा।
एमपी,विधायक का आश्वासन रहा है अधूरा
सबार गांव के लोगों ने दुर्गावती नदी पर पुल बनाने के लिए कई बार विधायक सांसद से कई कार्यक्रम में मांग उठाकर कर लिखित भी दिया गया है। लेकिन आजतक कोई पहल नहीं हुआ। सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा। दिवंगत भभुआ विधायक आनंदभूषण पांडेय, उनकी पत्नी रिंकी रानी पांडेय, भभुआ विधायक भरत बिंद और दो बार सासाराम सांसद छेदी पासवान से भी पुल बनाने की मांग की गई है। इन विधायक सासंद ने छलका पुल भी नहीं बनवाया बड़ा पुल तो दूर की बात है। लेकिन रामपुर जिला परिषद मद से छलका पुल बन रहा है।
बिना प्राक्कलन बोर्ड के हो रहा है काम
लोगों ने बताया कि दुर्गावती नदी में छलका पुल तो बनाया जा रहा है। लेकिन जिस योजना से यह काम हो रहा है उसका योजना स्थल पर प्राक्कलन बोर्ड ही नहीं लगाया गया है। लोगों को जानकारी ही नहीं मिल रहा है कि किस मद से और कितने की लागत से योजना का काम हो रहा है। सूत्रों द्वारा बताया जाता है कि योजना स्थल पर काम शुरू होने के बाद प्राक्कलन बोर्ड लगाया जाता है। लेकिन कई योजना स्थलों पर बिना बोर्ड लगाए ही योजना का काम कराया जा रहा है। इस पर विभागीय पदाधिकारी का भी ध्यान नहीं होता है।
बोले जिला परिषद प्रतिनिधि
इस संबंध में रामपुर जिला परिषद प्रतिनिधि नंदलाल राम ने बताया कि जिला परिषद मद से सबार गांव के दुर्गावती नदी में छलका पुल 6,85,200 रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। सबार गांव की जनता ने दुर्गावती नदी पर पुल बनाने की मांग की थी। लेकिन मेरे फंड में उतना बड़ा पुल नहीं बन सकता है। इसलिए मैंने कहा था कि छलका पुल बनाया जायेगा। जो छलका पुल बनाया जा रहा है। जो बरसात से बन जायेगा। प्राक्कलन बोर्ड नहीं लगाए जाने के सवाल पर कहा कि काम पूरा होने के बाद लगाया जाएगा।
