बिहार में शिक्षा का मंदिर इमली का पेड़, नीतीश कुमार के स्कूल में सालों भर ऐसे होती है पढ़ाई, शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल


दो कमरों में चलता है उत्क्रमित मध्य लेवा

कमरों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई में होती है परेशानी

मामला रामपुर प्रखंड के अमाव पंचायत के लेवाबांध गांव का

रामपुर कैमूर। रामपुर प्रखंड के अमाव पंचायत के लेवबांध गांव में उत्क्रमित मध्य विद्यालय है। जहां पर कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। लेकिन इस विद्यालय के लिए कमरों का अभाव है। जिसकी वजह से बच्चों को पढ़ाई में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय लेवा के खेल मैदान के परिसर में पुराना इमली का पेड़ है। जहां उस इमली के पेड़ के नीचे सालों भर कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की पढ़ाई होती है।

 ऐसे में गर्मी, जाड़ा, बरसात के दिनों में पढ़ाई के दौरान बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। क्योंकि यहां विद्यालय चलाने के लिए दो कमरा है और दो कमरा में 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाना मुमकिन नहीं है। विद्यालय के लिए कमरा का अभाव है। इसीलिए बच्चे पुराना इमली के वृक्ष के नीचे 9 सालों से पढ़ रहे है। कमरा का अभाव है तो क्या हुआ पढ़ाई करना है तो करना है।

 इसी दृढ़ निश्चय से बच्चे भी परेशानियों को झेलते हुए पढ़ते है। लेवाबांध गांव के ग्रामीणों का कहना है कि अभी वर्तमान में जहां स्कूल चल रहा है। वहां पर स्कूल के 2 कमरे है। इसी वजह से दो कमरे में बच्चो की पढ़ाई में परेशानी को देखते हुए इमली के पेड़ के नीचे बच्चों की पढ़ाई होती है। इस स्थिति में बच्चों को तो परेशानी होती होगी लेकिन फिर भी अध्यापक, बच्चे का क्या सकते है। 

इसके पहले जहां पुराना स्कूल चाहता था वहां भी दो ही कमरा था। वहां भी बच्चों को कमरे का अभाव में दो कमरा, बरामदे में बैठकर बच्चों को पढ़ना पड़ता था और परेशानी होती थी। जहां नया भवन बनाया गया वहां भी दो ही कमरा बनाया गया।फिर विभाग द्वारा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ने के लिए और कमरा नहीं बनवाया गया। 



407 बच्चे हैं नामांकित

 प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रजापति ने बताया कि इस विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक में 407 बच्चे नामांकित है। जिसमें 250 से 300 बच्चे प्रतिदिन आते है। यहां पर स्कूल चलाने के लिए 2 कमरे है। उन 2 कमरों में 5 से 8 कक्षा के बच्चे पढ़ते है। जबकि कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे स्कूल परिसर के प्राचीन इमली के पेड़ के नीचे जमीन पर बोरा बिछा कर बैठकर सालों भर पढ़ते है। जिससे बच्चो के पठन पाठन में परेशानी होती है। स्कूल में 6 शिक्षक है। जिसमें 4 शिक्षक और दो शिक्षिका है।


पढ़ाई में होती है परेशानी

 इस विद्यालय के कक्षा 1 में पढ़ने वाले महेश कुमार, प्रियंका कुमारी, कक्षा 2 के शौर्य प्रताप बादल कुमार, कक्षा 3 के रितेश कुमार ने बताया कि हमारे स्कूल में सिर्फ दो कमरा है। जिसमें एक कक्षा 5 से 8 तक के बड़े बच्चो के पढ़ाई होती है। जबकि इमली के पेड़ के नीचे कक्षा 1 से 4 तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। जिससे हमलोगों को पढ़ाई में काफी परेशानी होती है।इमली का पेड़ भी पुराना है।

 अगर कभी पुराना इमली का पेड़ गिर जाएगा तो बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।  बच्चों ने बताया कि गर्मी के दिनों में लू, जाड़े के दिनों में ठंड और बरसात के दिनों में बारिश होने से पढ़ाई में परेशानी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी तो बरसात के दिनों में ही होती है। जब पढ़ाई होती है तो बारिश होने के बाद वृक्ष के नीचे पढ़ाई नहीं हो पाती है। 

ऐसे में छोटे छोटे बच्चे स्कूल के बरामदे और कमरे में चले जाते है। एक साथ कमरे और बरामदे में बैठने में बच्चों को जगह नहीं मिल पाता है और पढ़ाई में भी काफी परेशानी होने लगती है।  अगर हमारे विद्यालय में चार कमरा बनवा दिए जाते तो बच्चों को पढ़ाई में परेशानी के सामने नहीं करना पड़ता। 

2015 में बना था दो कमरा

 विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुरेंद्र प्रजापति ने बताया कि जहां इस समय विद्यालय चल रहा है वहां पर वर्ष 2015 में दो कमरा बना था। तब से यहां पढ़ाई दो कमरे में कक्षा 5 से 8 तक के बच्चों की होती है। जबकि कक्षा 1 से 4 तक के बच्चों की इमली के पेड़ के नीचे पढ़ाई होती है। इमली के पेड़ भी जर्जर और पुराना है। भवन बनवाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान  विभाग को दो बार पत्र लिखा गया। लेकिन कोई पहल नहीं हुआ। विभाग द्वारा बताया जाता है कि कमरे बनवाने के लिए एसएसए मद में पैसे का अभाव है।

नहीं है चहारदीवारी

ग्रामीणों ने बताया कि इस विद्यालय के लिए कमरों का अभाव तो है ही साथ ही चहारदीवारी भी विद्यालय का नहीं है। जिसकी वजह से बच्चे विद्यालय से बाहर चले जाते है। विद्यालय के लिए कमरा निर्माण के साथ ही चहारदिवारी निर्माण कराने की मांग की गई है। 

आयरन और दूषित पानी पीते है बच्चें

इस विद्यालय की शिक्षक,शिक्षिका एवं बच्चों ने बताया कि विद्यालय के बच्चों और शिक्षकों का पानी पीने के लिए एक चापाकल है। जिससे पानी खराब निकलता है। पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा होता है। जिसे पीने में भी परेशानी होती है। अगर ऐसे ही बच्चे लगातार खराब दूषित पानी आयरन वाला पीते हैं तो उन्हें कई प्रकार की बीमारियों भी हो सकता है। ऐसे में यहां पर नल जल कनेक्शन या फिर नया चापाकल लगाने की जरूरत है।

 कहते हैं मुखिया प्रतिनिधि

इस संबंध में पूछे जाने पर अमाव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि एवं लेवाबांध गांव निवासी संजय राम ने बताया कि गांव के बच्चों को पढ़ाई में परेशानी होती है। क्योंकि यहां विद्यालय के कमरों का अभाव है। इसलिए तो बच्चे इमली के पेड़ के नीचे पड़ते है और कई सालों से पढ़ते आ रहे है। इसके लिए पंचायत समिति की बैठक में विद्यालय के कमरा निर्माण के लिए मुद्दा उठाया जाएगा। साथ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी कमरा निर्माण के लिए पत्र लिखा जाएगा।

मुझे जानकारी नहीं है ...बीईओ

इस संबंध में पूछे जाने पर रामपुर बीईओ रत्नेश सिंह ने बताया कि मुझे पेड़ के नीचे बैठ कर बच्चों के पढ़ने की जानकारी नहीं है। कमरा का अभाव है तो हेडमास्टर को एसएसए विभाग को पत्र लिखना चाहिए

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